अल्ट्रासोनिक तरंगें, यानी वे ध्वनि तरंगें जिनकी आवृत्ति मानव श्रवण सीमा (20 Hz – 20 kHz) से ऊपर होती है, विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में अनेक उपयोगी अनुप्रयोगों में काम आती हैं। चिकित्सा, उद्योग, और दैनिक जीवन में इन तरंगों का प्रयोग निरंतर बढ़ रहा है। इस लेख में हम अल्ट्रासोनिक तरंगों के उत्पादन की विभिन्न विधियों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
पीजोइलेक्ट्रिक प्रभाव द्वारा अल्ट्रासोनिक तरंगों का उत्पादन
पीजोइलेक्ट्रिक प्रभाव, अल्ट्रासोनिक तरंगें उत्पन्न करने का सबसे आम तरीका है। कुछ क्रिस्टल, जैसे क्वार्ट्ज और सिरेमिक पदार्थ, पर यांत्रिक दबाव डालने से उनमें विद्युत विभव उत्पन्न होता है। इस प्रभाव को पीजोइलेक्ट्रिक प्रभाव कहते हैं। इसके विपरीत, इन क्रिस्टलों पर विद्युत क्षेत्र लगाने से वे आकार में परिवर्तित होते हैं। अल्ट्रासोनिक तरंगें उत्पन्न करने के लिए, इन क्रिस्टलों पर उच्च आवृत्ति का विद्युत क्षेत्र लगाया जाता है, जिससे वे तेजी से कंपन करते हैं और अल्ट्रासोनिक तरंगें उत्पन्न होती हैं।
मैग्नेटोस्ट्रिक्शन प्रभाव द्वारा अल्ट्रासोनिक तरंगों का उत्पादन
मैग्नेटोस्ट्रिक्शन प्रभाव में, कुछ पदार्थों, जैसे निकल और फेराइट, के आकार में परिवर्तन चुंबकीय क्षेत्र लगाने से होता है। उच्च आवृत्ति का परिवर्ती चुंबकीय क्षेत्र लगाकर इन पदार्थों को कंपित किया जा सकता है, जिससे अल्ट्रासोनिक तरंगें उत्पन्न होती हैं। यह विधि पीजोइलेक्ट्रिक विधि की तुलना में कम कुशल होती है, लेकिन उच्च शक्ति की अल्ट्रासोनिक तरंगें उत्पन्न करने में उपयोगी है।
तरल सीटी द्वारा अल्ट्रासोनिक तरंगों का उत्पादन
उच्च वेग से बहते हुए तरल पदार्थ में अवरोध उत्पन्न करने से अल्ट्रासोनिक तरंगें उत्पन्न हो सकती हैं। यह विधि कम शक्ति की अल्ट्रासोनिक तरंगें उत्पन्न करती है और इसका उपयोग सीमित है।
विभिन्न उत्पादन विधियों की तुलना
| विधि | आवृत्ति सीमा | शक्ति | अनुप्रयोग |
|---|---|---|---|
| पीजोइलेक्ट्रिक | 20 kHz – 10 MHz | निम्न से मध्यम | चिकित्सा इमेजिंग, सफाई |
| मैग्नेटोस्ट्रिक्शन | 20 kHz – 100 kHz | उच्च | औद्योगिक सफाई, वेल्डिंग |
| तरल सीटी | < 100 kHz | बहुत कम | प्रवाह मापन |
अल्ट्रासोनिक तरंगों के उत्पादन की विभिन्न विधियों के अपने फायदे और नुकसान हैं। उपयोग के आधार पर, उपयुक्त विधि का चयन किया जाता है। चिकित्सा और निदान में पीजोइलेक्ट्रिक विधि का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, जबकि उच्च शक्ति वाले अनुप्रयोगों के लिए मैग्नेटोस्ट्रिक्शन विधि अधिक उपयुक्त है। भविष्य में, नई और उन्नत तकनीकों के विकास से अल्ट्रासोनिक तरंगों के उत्पादन और अनुप्रयोगों में और भी अधिक प्रगति होने की उम्मीद है।


